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रिया और उसकी माँ, सीमा, एक आम परिवार से ताल्लुक रखती थीं। उनके पिताजी एक सरकारी अधिकारी थे, और माँ घर की देखभाल करती थी। रिया अपनी माँ के बहुत करीब थी। वह हर बात अपनी माँ से साझा करती थी। सीमा भी अपनी बेटी को बहुत प्यार करती थी और उसकी हर इच्छा पूरी करने की कोशिश करती थी।
लेकिन जब बेटी बड़ी होती है, तो उसके और माँ के बीच के रिश्ते में बदलाव आने लगते हैं। बेटी अपनी खुद की पहचान बनाने की कोशिश करती है और माँ के साथ अपने रिश्ते को भी नए सिरे से परिभाषित करती है। mom with daughter story antarvasna hindi best
प्रिया ने राधा से कहा, "माँ, मैं भी आपको बहुत मिस करती थी। मैं जानती थी कि आप मुझे बहुत प्यार करती हैं और मैं आपके साथ समय बिताना चाहती हूँ।" रिया और उसकी माँ
RIA ने कहा, "बेटी, मैं तुम्हारी दोस्त हूँ, लेकिन मैं तुम्हारी माँ भी हूँ। मेरी जिम्मेदारी है कि मैं तुम्हें सही रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित करूँ।" मैं तुम्हारी दोस्त हूँ
धूप की पहली किरण जब अमृता की बालकनी पर पड़ती, तो वह छोटी-सी रस्सी पर लटके कपड़ों की खुशबू में अपनी माँ की यादों को तरजीह देती। अमृता की माँ, सीतल, हमेशा घर की हर चीज़ में सुकून खोजती—चाहे वह रसोई की थाली हो या आँचल में छिपी तसल्ली। पर अमृता के अंदर सदैव एक बेचैनी रहती: कुछ ऐसा जिसे शब्दों ने सँजो न सकी—एक अंतरवासन, जो न घर के पर्दों में छिपती, न रसोई के कोनों में।